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रुड़की(संदीप तोमर)। खोल दूं पोल में आज एक दिलचस्प हाल ही में घटित हुए किस्सा पढिये। बारिश जारी होगी तो आप इसे शायद और फुर्सत से पढ़ पाएं। किस्सा इतना गजब है कि जहां 2027 का विधानसभा चुनाव ग्राउंड पर शुरू होने में अभी समय है,भले राजनीतिक पैंतरेबाजी शुरू हो गई हो,वहीं अति दिलचस्प ये है कि 2022 के चुनाव में प्रत्याशी रहे एक नेता बिना टिकट घोषित हुए एक तरह से प्रत्याशी बन खुद मैदान में उतर गए और इससे भी बड़ी बात ये कि एक नेता की एक बात से शुरू हुआ यह युद्ध एक ही पार्टी के नेताओं के बीच शुरू हो गया और किसी विपक्षी पार्टी की भी जरूरत इन सभी को नहीं पड़ी।
लगातार जारी बरसात के बीच आपने चाय के साथ पकौड़े मंगा लिए हों तो खोल दूं पोल विधिवत शुरू करते हैं। दरअसल यहां पार्टी के रूप में बात हो रही है सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की और पूर्व प्रत्याशी का नाम है मुनीश सैनी। विधानसभा क्षेत्र है कलियर। जिसके कथन से बिना मतदान का युद्ध शुरू हुआ वो हैं इसी विधानसभा में रहने वाले पार्टी के पुराने नेता(वरिष्ठ नेता मयंक गुप्ता के अति निकटस्थ) संजय प्रजापति,जिनके पुत्र युजुर प्रजापति नगर निगम पार्षद भी हैं। दरअसल संजय प्रजापति ने दिनांक 28 जून 2026 को एक पोस्ट फेसबुक पर पोस्ट की,5 बार एडिट की गई इस पोस्ट पर संजय ने जो लिखा वो यहां अक्षरक्ष पढ़िए—रुड़की जिले की 6 विधानसभा में से कलियर विधानसभा एक ऐसी सीट है जहां के पदाधिकारी अपने पद की गरिमा का ध्यान नही रखते हुए व्यक्ति के लिए सोशल मीडिया पर प्रायोजित तरीके से कमेंट करते हैं मसाला बहुत है टाइम आने पर तय हो जाएगा पदाधिकारी संगठन के साथ हैं या व्यक्ति के जल्द प्रदेश नेतृत्व को इस से अवगत कराया जाएगा चुनाव आ रहे हैं आपने जिनको जिम्मेदारी दी है वह संगठन के व्यक्ति है या विशेष व्यक्ति के पिछली बार संगठन को और प्रत्याशी को इसका बहुत भारी नुकसान हुआ था यह प्रत्याशी भी जानते हैं और हम सब भी
इसके जवाब में कुछ कमेंट संजय के पक्ष में आए लेकिन पार्षद पुत्र सूरज नेगी इस शोसल मीडिया जंग में कूदे और उन्होंने लिख डाला कि Sanjay Prjapati भाईसाहब वैसे एक बात है कार्यकर्ता या पदाधिकारी जिस भी व्यक्ति विशेष की बात कर रहे हैं वो है तो वास्तव में भाजपा के ही और भाई साहब सच्चाई भी यही है पुनः पार्टी से निवेदन यही है Munish Saini के अलावा कोई कलियर नहीं जीत सकता है
सूरज नेगी के यह लिखते ही इस जंग में पूर्व प्रत्याशी रहे भाजपा वरिष्ठ नेता मुनीश सैनी की एंट्री हो गई।
हालांकि इससे पूर्व संजय प्रजापति लिख चुके थे कि कल से अब तक पोस्ट पर मैसेज मैंने देखे हैं ना तो इसमें किसी प्रत्याशी दावेदारी का नाम है ना किसी पदाधिकारी का नाम है लेकिन चलती बस में चढ़ रहे हैं उन्हें यह नहीं पता लगातार तीन बार से विधानसभा हम हारते आ रहे हैं अगर संगठन के सभी पदाधिकारी साथ आ जाए तो इस बार हम चुनाव जीत सकते हैं लेकिन रोटी तो अपने तवे पर सेखनी है ना मेरी कोई दावेदारी है ना मैं चुनाव लड़ रहा हूं संगठन के बात की है करता रहूंगा और ऐसे भी लोग हैं जो अपने आप को वरिष्ठ बताते हैं मेरी उम्र बीत गई सघं और संगठन में
यूं इस कथन के बाद संजय को रिप्लाई के तौर पर पार्टी कार्यकर्ता अरुण सैनी से यह भी सुनना पड़ा कि Sanjay Prjapati हारने का कारण भी तो हमारे ऐसे पदाधिकारी हैं तो चुनाव के टाइम पर अपना-अपने बताते हैं और चुनाव के अंत पर अपना लेकर बैठ जाते हैं और फिर पूरे 4 साल अपना मजा लेते हैं। उन पैसों का और 5 साल फिर अपना उठ जाते हैं कि हम तो वरिष्ठ कार्य करता है। हम तो निष्ठान कार्य करता है।
यहां उल्लेखनीय है कि टीम मयंक गुप्ता के ही चौधरी योगी रोड़ ने कॉमेंट के रूप में तालियां बजाकर संजय की बात का समर्थन किया। पार्टी नेता रामगोपाल कंसल ने भी राइट लिखकर संजय को स्पोर्ट किया। लेकिन आकाश छाछर ने एक तरह से धो देने वाला कॉमेंट दे मारा–-मेरी एक बात समझ नहीं आ रही है माननीय भाईसाहब Sanjay Prjapati जी कि भाजपा पदाधिकारी जिनको संगठन ने जिम्मेदारी दी है वो व्यक्ति विशेष कैसे हो गए आपका यह नजरिया सरासर गलत है क्युकी वो सभी व्यक्ति भाजपा के ही पदाधिकारी है जो टिकट माँग रहे है और सभी पदाधिकारीयों के अपने अपने विचार वाले व्यक्ति से विचार मिलते है तो वो अपनी व्यक्तियों के लिए अडिग हो जाते है इसमें कोई व्यक्ति विशेष वाली बात तो नहीं है अभी किसी को टिकट नहीं हुआ और किसी ने भी पार्टी विरोधी गतिविधिया नहीं की है अभी तो आप पहले ही कैसे कह सकते है किसी को
भी कि कोई व्यक्ति विशेष के लिए कार्य कर रहा है ये बात आपकी पूरी तरह से गलत है और आपको इस पर पूर्ण विचार करके कमैंट्स हटा देना चाहिए
पार्षद संजीव तोमर का कॉमेंट सकारात्मक व व्यक्ति विशेष के लिए नहीं बल्कि पार्टी के लिए था कि जिसे भी पार्टी प्रत्याशी बनाए उसका साथ दिया जाए।
कलियर मंडल के पूर्व अध्यक्ष चौधरी आदित्य रोड ने संजीव तोमर की बात का समर्थन किया लेकिन कुछ दबे से शब्दों में अपनी यह पीड़ा भी उजागर की कि जो आज पार्टी की गरिमा संगठन की रीति नीति और संगठन की बात करते हैं वह सब मैंने चुनाव में देखा है जब मैं मंडल अध्यक्ष था
और जल्दी ही चुनाव आने वाले।।,,,??????
खैर चूंकि पूर्व प्रत्याशी मुनीश सैनी का नाम सूरज नेगी ले चुके थे तो जहां मुनीश के पक्ष और अपरोक्ष विपक्ष में कमेंट आने लगे वहीं मामला तब संगीन हो गया जब खुद मुनीश सैनी शोसल मीडिया की भाजपाइयों द्वारा आपस में ही लड़ी जा रही इस लड़ाई में कूद पड़े और उन्होंने लिख डाला कि संजय जी आपको व्यक्ति विशेष ज्यादा दिखाई दे रहा है। क्या या फिर उसके बाद आप अपने व्यक्ति विशेष को लाना चाहते हो?क्या आप रोज इस तरह की लिख रहे हो?मैं बोल नहीं रहा हूं भी
इसके बाद रवि रोड बीजेपी के कॉमेंट ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने लिखा कि भाई साहब कुछ लोग जो 2017 चुनाव में कहीं नहीं थे आज वह लोग पदाधिकारी बने बैठे हैं जो लोग उस समय शहजाद के तलवे चाट रहे थे आज वह लोग ज्ञान बता रहे हैं 2017 चुनाव के बाद जब उन लोगों पर प्रशासनिक दबाव बना तब उन लोगों ने भाजपा ज्वाइन की तब भाजपा के पदाधिकारी अपना परिवार बढ़ाने की बात कर रहे थे उनको यह नहीं पता था कि यह लोग जयचंद हैं मौका मिलते ही पलटी मार जाएंगे संजय जी भाई साहब आप तो बहुत पुराने कार्य करता हैं आप बहुत पहले ही मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं लेकिन आज पुराने कार्यकर्ताओं का कोई औचित्य नहीं बचा है अब तो सब पदाधिकारी सिर्फ एक ही व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं
इसका अगला कॉमेंट मुनीश सैनी का आया,उन्होंने कहा कि
यह आपके चलाने से पार्टी चलेगी क्या
जवाब में संजय प्रजापति डट खड़े हुए Munish Saini पार्टी ना आपसे चल रही है ना मेरे से चल रही है संगठन से चल रही हे
यहां गीता मलिक ने संजय को घेर लिया Munish Saini सही कहा अपने भाई साहब जैसे की हमारे वार्ड में संजय भाई साहब के वार्ड का पानी आ रहा है जिस वजह से हमें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है अबकी बार जैसे ही बारिश होगी तो बहुत दिक्कत है पैदा होगी इसी वजह से पार्टी में जिनको जिम्मेदारी दी है उन्हें अपनी जिम्मेदारी पर ध्यान देना चाहिए ध्यान भटकाने के लिए अन्यथा बातें करते हैं
मुनीश सैनी ने गीता मलिक के कॉमेंट पर कुछ नहीं कहा अलबत्ता लिखा कि आपके हाथ में टिकट हो तो अपने व्यक्ति विशेष को दे दो वो यहीं तक नहीं रुके बल्कि यह भी कहा कि मैं बोलता नहीं हूं,संजय भाई आप बार बार कमेंट करते हैं। इस बात पर पार्टी तो संगठन से ही चलती है या तुम अपने घर से चलाना चाहते हो
जवाब में संजय बोले —Munish Saini वह तो आपके हाथ में ही है हम तो कार्यकर्ता हैं जिसको टिकट होगा काम किया है काम करते रहेंगे
प्रत्युत्तर में मुनीश सैनी ने जो लिखा उसमें किसी पंकज नाम के शख्स के एंट्री भी उन्होंने कर दी। उन्होंने लिखा कि Sanjay Prjapati मैं नहीं बोलता हूं ना आप मेरे बारे में कमेंट से कम करा करो। मैं आज बोल रहा हूं आपको इस बात को पंकज जी कल के पास आएंगे वो काम कर देना उनका
उनके इस कॉमेंट से ऐसा भान होता है कि मुनीश सैनी या उनके पंकज जी का कोई काम संजय प्रजापति पर ड्यू है। एक तरह से उनके कमेंट्स से हिसाब-किताब सी कुछ बात महसूस हुई(हालांकि खुलासा न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता) खैर जवाब में संजय ने मुनीश को लिखा कि Munish Saini मैंने कभी आपका नाम लेकर कॉमेंट नहीं किया ना इसमें आपका नाम है मैं संगठन की बात की है टिकट कल किसी का भी हो काम संगठन के लिए होगा आप स्वयं आए हैं और आ जाए बैठ कर बात कर ले पंकज जी
इसके अलावा अन्य भी कॉमेंट जो 100 से ज्यादा है वो इस पोस्ट पर एक तरह के वाक युद्ध की तरह हुए हैं। इनमें खास बात यह है कि सभी भाजपाई हैं। बिना चुनाव हुए ही भाजपाई आपस में लड़ रहे हैं किसी विपक्षी पार्टी की जरूरत भी उन्हें यहां नहीं पड़ रही है। तो फिर सवाल ये है कि ये लड़ाई चाहे टिकट की ही हो तो मुनीश सैनी या उनके समर्थकों की हो किसके साथ रही है?इसका जवाब भी यहीं आपको दे देते हैं। दरअसल एक तरफ जहां मुनीश सैनी पिछले चुनाव के बाद से यहां लगातार काम कर रहे हैं और उनकी टीम भी पूरी सक्रिय है। ऐसे समय में इस कलियर सीट से पार्टी नेत्री रोमा सैनी की टिकट की दावेदारी भी पिछले कुछ वर्षों से प्रमुखता से उभरी है। उन्हें स्थानीय निवासी प्रदेशीय नेता मयंक गुप्ता का पूरा आशीर्वाद सर्विदित है। यूं भी कह सकते हैं कि मयंक गुप्ता पार्टी टिकट के लिए रोमा सैनी के पैरोकारों में से एक हैं। व्यक्तिगत शिक्षा,चरित्र,राजनीतिक सूझबूझ या टीम की बात करें तो मुनीश सैनी और रोमा सैनी दोनों एक दूसरे से कम नहीं है। अलबत्ता मुनीश सैनी पर एक विधानसभा चुनाव लड़ने का अनुभव ऐसा है जो रोमा सैनी के पास अभी नही है। यूं रोमा सैनी से अलग भी यहां पार्टी टिकट के दावेदार हैं लेकिन बताया जा रहा है कि मुनीश सैनी अपने कंपीटीटर के रूप में रोमा सैनी को ही देख रहे है। जिस फेसबुक पोस्ट को लेकर यह पूरा समाचार है उसमें भी पार्टी के कई लोगों ने रोमा सैनी को भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने की मांग की है। शायद तभी मुनीश सैनी खुद इस आभासी दुनिया की लिखतम जंग में कूद पड़े। वैसे इन सब हालातों को देखते हुए यहां से तीसरी बार विधायक और लगभग तय अगले कांग्रेस प्रत्याशी फुरकान अहमद को जरूर सकूं मिल रहा होगा। यूं भी इस सीट पर भाजपा की हार का एक कारण यह भी माना जाता है कि यहां पार्टी टिकट के दावेदार रहने वालों या पिछला चुनाव हारने वालों की आपसी सिर फुटव्वल भी पार्टी हार का एक कारण बनती है। आरोप है कि यहां से चुनाव हारे सबसे अहम चेहरे श्यामवीर सैनी ने हार के बाद कभी यहां पार्टी की मजबूती व एकता के लिए व्यक्तिगत कोई अभियान नहीं छेड़ा। हां व्यक्तिगत सुविधा लेने में वह कभी पीछे नहीं रहे,संघ कोटे से अब दूसरी बार दर्जधारी राज्यमंत्री हैं और बकायदा सालों से कैबिनेट मंत्री स्तर की सिंचाई विभाग की कोठी में अपना बारदाना जमाये बैठे हैं। खैर संजय प्रजापति की जहां तक बात है तो वह अपने नेता मयंक गुप्ता के किसी अपरोक्ष इशारे को समझ रोमा सैनी को भाजपा प्रत्याशी के रूप में देखना चाहते होंगे और इधर मुनीश सैनी की टीम शोसल मीडिया पर उनके समर्थन में गर्दा ठाय है तो तभी शायद संजय ने उपरोक्त पोस्ट की। इसे यूं भी किसी हद तक जस्टिफाई किया जा सकता है कि हाल ही में संजय प्रजापति ने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयान जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर चुनाव टिकट दावेदारी को अनुशासनहीनता मानने की बात कही है को लेकर एक नहीं तीन पोस्ट की है। वैसे संजय प्रजापति के लिए सवाल ये भी है कि क्या उन्होंने बिना नाम लिए एक टिकट की दावेदार के पक्ष में दूसरे टिकट दावेदार के बड़े सोशल मीडिया कैंपेन को चुनौती नहीं दी? उनसे सवाल है कि यदि उन्हें सोशल मीडिया पर टिकट दावेदारी से ही दिक्कत है और भविष्य में चुनाव नजदीक आने के साथ यह सिलसिला रोमा सैनी पक्ष की ओर से बढ़ा तो भी क्या वह विरोध करेंगे?
(खोल दूं पोल इतिश्री)
नोट–खबर का उद्देश्य सिर्फ नाम लेकर वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को सामने रखना है,किसी की मानहानि करना या व्यक्तिगत छवि खराब करना नहीं। पोस्ट के सभी स्क्रीन शॉट सुरक्षित हैं कुछ यहां खबर में प्रकाशित किए जा रहे हैं।
