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रुड़की(संदीप तोमर)। विश्व की विशालतम यात्राओं में से एक कांवड़ यात्रा को कुशलता से सम्पन्न कराने के प्रयासों में हरिद्वार पुलिस जी जान से जुटी है। एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने पूरी कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने की बाबत पुलिस की रणनीति को मोटे तौर पर पिछले दिनों प्रेस से साझा किया था। पुलिस की गंभीरता को इससे समझा जा सकता है कि कांवड़ यात्रा की विधिवत शुरुवात होने से कई दिन पहले ही पुलिस को मैदान ड्यूटी में उतार दिया गया था। ऐसे में विगत शुक्रवार पंचक शुरू होने से पहले कांवड़ियों के सैलाब को निर्विघ्न हरिद्वार जिले की सीमाओं से गुजारने में हरिद्वार पुलिस सफल रही। हालांकि माना जा रहा है कि पुलिस की अग्नि परीक्षा आज मंगलवार को रात लगभग 10 बजे समाप्त हो रहे पंचक बाद शुरू होगी,क्योंकि धार्मिक मान्यता अनुसार पंचक में भोले के भक्त कांवड़ नहीं उठाते और पंचक बाद कांवड़ियों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रहने वाली है,ऐसा रेल,बसों व निजी वाहनों से हरिद्वार की ओर आगमन कर रहे शिव भक्तों की संख्या बता रही है। ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश सेमवाल के अनुसार मंगलवार रात 9 बजकर 54 मिनट पर पंचक अवधि समाप्त हो रही है। खैर स्थानीय लोगों को होने वाली समस्याओं को लेकर इस बार पुलिस ने एक तरह से हाथ ही जोड़ लिए हैं। यहां उल्लेखनीय है कांवड़ के दौरान दो भागों में गंगनहर किनारे स्थापित रुड़की शहर के कई रास्तों को बंद कर दिया जाता है। ऐसा ही इस बार भी हुआ है,लेकिन इस बार सख्ती थोड़ा ज्यादा है। समझा जा सकता है कि पुलिस की प्रथम वरीयता कांवड़िये हैं और संख्या को देखते हुए यह होने भी चाहिए। ऐसे में कुछ रोज थोड़ी बहुत परेशानी स्थानीय लोगों को उठानी ही पड़ेगी। कुल मिलाकर कुछ चुट पुट बातों को छोड़ दें तो अभी तक पुलिस अपने इंतजामों पर खरी उतरी है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जिला प्रशासन और पुलिस बेहतर आपसी तालमेल से काम कर रहे हैं। डीएम मयूर दीक्षित खुद कमान संभाले हुए हैं तो एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर भी हर स्थित पर व्यक्तिगत निगाह रखें हुए हैं। तस्वीर का एक दूसरा पहलू यह भी है कि अब पैदल कांवड़िए पटरी छोड़ हाइवे का रुख कर रहे हैं। ऐसे में पहले ही झांकियों और डीजे कांवड़ से लबरेज हाईवे घुटन महसूस करने लगा है। यहां पुलिस प्रशासन का यह दावा भी पूरा होता नहीं दिख रहा कि कांवड़ के दौरान हाइवे सामान्य ट्रैफिक के लिए खुला रहेगा। ऐसे में अभी पूरा जोर कांवड़ पटरी को चलाए रखने पर है लेकिन लगता नहीं कि इसमें कामयाबी मिल पाएगी। क्योंकि हर बार प्रशासन यह भूल जाता है कि शुरुवात में पटरी से जो कांवड़िए गुजरते हैं वो अधिकांशतः बहुत लंबी दूरी के होते हैं वह खुद ही शांत माहौल में खाली पटरी से गुजरते हैं उन्हें यहां से गुजारना नहीं पड़ता। पर अब जो कांवड़िए आयेंगे वह हाईवे से ही जाना पसंद करते हैं ऐसे में एक दो रोज के भीतर ही कांवड़ पटरी सुनी नजर आए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। खैर फिलहाल तो स्थानीय नागरिक पटरी के दोनों हिस्सों के पुलों में एक पर पूर्ण बंदी और अन्य पर जाम के झाम के कारण परेशान हैं। हर वर्ष की भांति एक बार फिर कांवड़ पटरी बंद कर कांवड़ हाईवे से चलाए जाने की मांग का शोर सुनाई देने लगा है। दिलचस्प यह है कि तमाम कड़वे अनुभवों के बाद भी हर बार कांवड़ पटरी हरिद्वार से यूपी की ओर गंगनहर पर कांवड़ियों के लिए चला दी जाती है। जबकि मांग तो इसे पूर्ण बंद करने या फिर यूपी की ओर से हरिद्वार हेतु ट्रैफिक के लिए चलाए जाने की रहती है।
